मेरे काफी सारे अफेयर थे, परंतु एक ऐसा था जिसने मुझे प्यार के सही मायने बता दिए। मुझे और मेरी पत्नी को बहुत मुश्किलों से गुजरना पड़ा. कई साल हम साथ भी नहीं रह पाए। मेरी उम्र कुछ 28 साल और मेरी पत्नी की उम्र कुछ 23 साल थी जब हमारी शादी हुईं, बिना एक दूसरे की मर्जी के। मेरी पत्नी कभी मुझसे शादी नहीं करना चाहती थी, क्योंकि उसको मेरे सारे अफेयर के बारे में पता था और में भी ऐसी किसी लड़की से शादी नही करना चाहता था जिसे मेरे बारे में सब पता हो।

हमारे परिवार में शादी के वक्त लड़के व लड़की से कम ही पूछा जाता है उसकी पसंद के बारे में। शादी के करीब दो महीने पहले की बात है मुझे पता पड़ा कि मेरी होने वाली पत्नी ने सुसाइड करने का प्रयास किया हैं। पता नही क्यो मुझे बहुत बुरा लगा, में और कुछ घरवाले उसे देखने हॉस्पिटल पहुंचे, वहाँ पुलिस को देखने ही मेरे होश उड़ गए। पुलिसवालों ने मुझसे पूछताछ की पर मुझे जिम्मेदार नही ठहराया। लडकी ने बयान दिया था कि वह पढ़ाई को लेकर परेशान थी।

परन्तु मै जानता था कि कारण कुछ और ही था, और वो मैं था। मुझे इतना नीचा कभी महसूस नही हुआ था। ऐसा लग रहा था मानो मै एक घटिया इंसान हूँ। ठीक है ये सोचकर मैँने उससे बात करने की सोची पर उसके घरवालों ने यह कहकर टाल दिया कि वो अभी बात करने की मानसिक अवस्था मे नही है।

परंतु मुझे तो बात करना ही थी बस। मैंने अपनी बहन के हाथों एक पत्र भिजवाया और माफ़ी माँगकर मिलने के लिए आग्रह किया। उसने कहा वो तैयार है पर उसकी मम्मी वहाँ होंगी व मेरी बहन भी उपस्थित होंगी।

ठीक है भाई मैं मान गया। हम लोग मिले और मैंने उससे सुधरने के लिए एक मौका माँगा यह कहकर की वो सब मेरा बचपना था और मैं भी एक अच्छा व सच्चा इंसान हूँ। काफी बार प्लीज बोलने के बाद वो मान गयी। मैं ख़ुश था और सोच रहा था कि मैंने उसे तैयार कर लिया अब कोई परेशानी नही हैं। मैं फिर से अपनी मनमानी कर सकता हूँ। पर नही मै सच मे बदलना चाहता था। और मै बदला भी, अब मै सिर्फ़ उससे ही प्यार करता था, उड़के बारे में ही सोचता था।

हमारी शादी हुईं। मैं बहुत खुश था। तीसरे दिन ही मेरी एक पुरानी गर्ल फ़्रेंड ने मुझे कॉल किया और हंगामा खड़ा करने की धमकी दी। उसने कहा कि वो प्रेग्नेंट है चार महीने से। मुझे ऐसा लगा कि मैं अब सुसाइड कर लूं। मैंने खुद को संभालते हुए उस लड़की से पूछा कि अगर कुछ ले दे मामला सैटल कर है, और वो मान गयी, पूरे चार लाख लिए उसने।

बस अब लाइफ में कुछ टेंशन नही था। ठीक दो दिन बाद मेरी बहन घर आई और कहने लगी कि मुझसे बात करना चाहती है। मैंने कहा बोलो तो वो बोली की अकेले में कुछ बात करना है, आते ही बराबर उसने मुझे एक थप्पड़ जड़ दिया। मैं समझ गया कि ये उस लड़की का ही किया धारा है।

फिर टेंशन चालू। है भगवान। ये क्या हो रहा था मेरे साथ। मेरी बहन ने मुझे बहुत डॉटा और में बस सुनता रहा। अचानक ही मुझे किसी के रोने की आवाज़ आई देखा तो वो मेरी पत्नी थी। उसने शायद सब सुन लिया था। अब तो मुझ पर पहाड ही टूट पड़ा था। मैं सच मे अपनी पत्नी को बहुत चाहता था, और किसी भी कीमत पर उससे अलग नही होना चाहता था। पर अभी मुझे अपने किये कर्मो का शायद भुगतान करना बाकी था।

मेरी पत्नी इतनी नाराज़ और शायद बुरा फील कर रही थी कि वो मेरे पास आई, मुझे एक थप्पड़ मारा और जोर से मेरे ऊपर थूंक दिया। इतना अपमान मेने पूरी ज़िंदगी मे कभी नहीं सहा था, पर फिर भी मै खामोश था। मेरी पत्नी ने मुझे छोड़ दिया।

सब कुछ इतनी जल्दी हो रहा था कि मैं कुछ समझ ही नही पा रहा था। पर मुझे पूरी तरह विश्वास था कि मेरे और उस लड़की में इतना कुछ नही हुआ था कि वो प्रेग्नेंट हो जाये। अभी मेने ये लडाई लड़कर जितना ठान लिया।

हमारे देश के कानून कुछ इतने पेचीदा है लड़को के लिए की अगर अब में कुछ भी उस लड़की को करता तो फस सकता था। मैँने भी कानून का ही सहारा लिया। तीन साल तक लड़ता रहा और जीत भी, इसलिए नही की मै सही था बल्कि इसलिए कि मैने अपनी पत्नी की आँखों मे वो प्यार देखा था, मेरी बहन को भी कही ना कहीं मुझ पर भरोसा था। मेरी माँ ने हमेशा मेरी हिम्मत बाँध के रखी। ईश्वर की कृपा से मुझे सब कुछ वापस मिला। ना सिर्फ मेरी खोई हुई इज्ज़त बल्की मेरा प्यार भी।

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